विशेष - श्रीमदभागवत महापुराण कथा, पितृ दोष शांति निवारण , कालसर्प दोष, संगीतमय सुंदर कांड पाठ ....
।। राशिफल ।।

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प्रत्येक मनुष्य का जीवन विभिन्न प्रकार कि घटनाओ । परिस्तिथियों से परिपूर्ण रहता है । वस्तुतः जीवन में जो कुछ घटित होता है अर्थात सुख , दुःख के पीछे प्रत्येक व्यक्ति के कर्म व नवग्रहो कि स्तिथि ही उत्तरदायी होती है।

जन्मपत्री कि सही-सही गणना करके जीवन में होने वाली घटनाओ व स्तिथियो का सही आकलन किया जा सकता है।

महादशा , अन्तर्दशा, योगिनिदशा, नवग्रहों कि स्तिथि (या नीच ग्रह) । अन्य ग्रहो कि द्रष्टि व भाव , नवमांश व अन्य कुंडली में ग्रहो का विचार कर विभिन्न प्रकार के दोषो का पता लगाया जाता है।

एक कुशल ज्योतिषी पंडित विभिन्न अत्यंत अनिष्टकारी योगो को (यदि जातक को कुंडली में हो) तो अवगत कराता है।

विभिन्न घातक योग जैसे कालसर्प योग (आंशिक / पूर्ण) मांगलिक योग(आंशिक / पूर्ण) पितृ दोष, गुरु चांडाल योग, मंगल अंगरक्दोष, गंडमूल योग आदि का कुशलता पूर्वक विचार करके उचित समय पर कुशल ज्योतिषी से परामर्श करके उपरोक्त घातक योगो की सही समय पर व्यावसायिक शान्ति कराकर जीवन में आने वाली शारीरिक , व्यवसाहिक ,वैवाहिक , नौकरी व व्यवसाय समन्धि विभिन्न बाधाओ का निवारण किया जा सकता है व जीवन को सुखी व संपन्न बनाया जा सकता है।

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